ग्रेटर नोएडा में दो ड्रग्स लैब का पर्दाफाश: अमित शाह ने की सराहना, पर स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल?

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ग्रेटर नोएडा में दो गुप्त ड्रग्स लैब का भंडाफोड़ होने के बाद नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. दोनों लैब से भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स नशीले पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और उपकरण बरामद किए गए हैं. इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें एक विदेशी मूल का नागरिक भी शामिल है. अब दो गुप्त लैब पकड़े जाने से यह सवाल और अहम हो गया है कि कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग शामिल हैं. साथ ही इन नशीले पदार्थों की आपूर्ति कहां-कहां की जा रही थी.

दरअसल गौतम नगर जिले के जहानाबाद कादलरपुर गांव में किराए की जगह पर चल रही इन लैब्स से 379.740 किलोग्राम और एम्फेटामाईन युक्त पदार्थ,10 किलोग्राम स्यूडोएफेड्रिन विभिन्न रसायन और लैब उपकरण बरामद किए हैं. यह कार्रवाई ऑपरेशन क्रिस्टल हट के तहत की गई है.

स्थानीय पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल

लगातार सामने आ रहे हैं ऐसे मामलों के बीच स्थानीय पुलिस के निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि स्थानीय पुलिस को इन लैब की पहले से जानकारी थी या नहीं. जांच में इस पहलू को भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि इन ठिकानों पर गतिविधियां कब से चल रही थीं और संबंधित एजेंसी को इसकी सूचना कैसे मिली. सूत्रों के मुताबिक यह ड्रग्स लैब एक मकान में चल रही थी. फिलहाल अब स्थानीय पुलिस उस मकान के मालिक और वहां पर मौजूद लोगों की जांच पड़ताल में जुट गई है.

ड्रग्स कार्टेल के खिलाफ सरकार सख्त

इस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने (NCB) नारकोटिक्स केंद्रीय ब्यूरो की अपने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर एक ट्वीट किया है. उन्होंने शाबाशी देते हुए कहा है कि ग्रेटर नोएडा में इस ड्रग लैब का पर्दाफाश खुफिया आधार पर मिली जानकारी के तहत किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार देश में नशे के खिलाफ है. और देशभर में फैले इस अवैध नशे की कारोबार को खत्म करने और इसमें शामिल पूरे ड्रग्स कार्टेल नेटवर्क को ध्वस्त करने में प्रतिबंध है.

गृहमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का यह लक्ष्य है कि 2029 से पहले ड्रग कंट्रोल के नेटवर्क को खत्म करना है. इसके लिए नारकोटिक्स ब्यूरो इस अवैध कारोबार को पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है.

अब पूरे नेटवर्क तक पहुंचना बड़ी चुनौती

इस मामले में केवल लैब संचालकों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी. जांच एजेंसी को केमिकल के आपूर्ति टैक्स की बिक्री संभावित खरीदारों और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी करनी होगी. ग्रेटर नोएडा में हुई कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच एजेंसी इस अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर पाएंगे? पहले भी ग्रेटर नोएडा में साल 2024, 2025 में स्थानीय पुलिस ने बड़े स्तर पर ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था लेकिन अब साल 2026 में हुई ड्रग लैब के पर्दाफाश को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

 

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