
देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में डेटा सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. एक थ्रेट एक्टर ग्रुप (हैकर्स के समूह) ने बैंक के डेटा में सेंधमारी का दावा किया है. इस घटना के बाद बैंक तुरंत हरकत में आ गया है. मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, एसबीआई ने अपनी बीमा कंपनी को इस संदिग्ध डेटा ब्रीच की जानकारी दे दी है. बैंक अभी इस बात का हिसाब लगा रहा है कि इस घटना का दायरा कितना बड़ा है. संभावित नुकसान का पूरा आकलन करने के बाद ही बैंक बीमा क्लेम फाइल करेगा.
डार्क वेब पर लाखों डेटा लीक होने का दावा
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब एक हैकर ग्रुप ने डार्क वेब पर बैंक का डेटा लीक करने का दावा किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ग्रुप ने करीब 3,75,000 डेटा रोज (rows) के साथ 2,722 पीडीएफ डॉक्यूमेंट्स डार्क वेब पर डाले हैं. ये देश के सबसे बड़े बैंक से जुड़ा मामला है, इसलिए इसकी गंभीरता से जांच हो रही है. एसबीआई ने खुद डार्क वेब पर मौजूद इन रिकॉर्ड्स की जांच की है. इस जांच में बैंक को 3,897 ऐसे कस्टमर रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें ग्राहकों की निजी पहचान से जुड़ी जानकारियां (PII) मौजूद हैं.
ग्राहकों की कौन सी जानकारियां बाहर आईं
डार्क वेब पर जो डेटा सामने आया है, उसमें ग्राहकों की बेहद निजी जानकारियां शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, लीक हुए डेटा में ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल आईडी के अलावा घर के पते भी शामिल हैं. इसके अलावा लोन के लिए दी गई अर्जियों (Loan Applications) से जुड़ी डिटेल्स भी इसमें होने की बात सामने आई है.
1,425 करोड़ रुपये की साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी
इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संदिग्ध डेटा लीक के बाद एसबीआई अपनी साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत पेआउट यानी मुआवजे की मांग कर सकता है. बैंक ने सरकारी बीमा कंपनी ओरिएंटल इंश्योरेंस से 1,425 करोड़ रुपये की साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी है. इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि एसबीआई क्लेम के लिए बीमा कंपनी को सूचित करने की प्रक्रिया में है. हालांकि, इस पूरे मामले पर जब एसबीआई या ओरिएंटल इंश्योरेंस से सवाल पूछे गए, तो दोनों की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला.
कैसे तय होगा बीमा क्लेम का पैसा
1,425 करोड़ रुपये की रकम इस बीमा पॉलिसी की अधिकतम सीमा (Coverage Ceiling) है. बैंक को कितना पैसा मिलेगा, ये पॉलिसी के नियमों पर निर्भर करेगा. इसके अलावा घटना की प्रकृति के साथ-साथ इस बात की भी जांच होगी कि हुआ नुकसान पॉलिसी के दायरे में आता है या नहीं. एक इंश्योरेंस ब्रोकर के मुताबिक, एक अच्छी साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी डेटा प्रोटेक्शन कानून के उल्लंघन से होने वाले खर्चों या देनदारियों को भी कवर कर सकती है. ये पूरी तरह पॉलिसी की शर्तों के अलावा लागू कानून पर निर्भर करता है. हालांकि, सरकारी या रेगुलेटरी जुर्माने पर कई तरह की पाबंदियां या छूट की शर्तें लागू होती हैं.
जांच में जुटी साइबर सुरक्षा एजेंसी
डेटा लीक की ये घटना सामने आने के बाद एसबीआई ने अपने साइबर इंसिडेंट रिस्पॉन्स प्रोसीजर को एक्टिव कर दिया है. बैंक ने इस मामले की तह तक जाने के लिए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया है. ये एजेंसी CERT-In के पैनल में शामिल है. फिलहाल ये एजेंसी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है ताकि डेटा लीक की असल वजह के साथ नुकसान का सही पता लगाया जा सके.








