दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों में विदेशी कनेक्शन का दावा! फ्रांस से मैसेज भेजने के आरोपों के बीच चर्चा में ‘इंडिया अलायंस पेरिस’

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एक अमेरिकी मीडिया संस्थान की रिपोर्ट में फ्रांस में हुए दंगों और भारत में हुए प्रदर्शनों के बीच संबध होने का दावा किया गया है. फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में यूरोप में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े 101 संगठनों का जिक्र किया गया है, इन संगठनों का नेटवर्क 9 देशों में फैला हुआ है. ये संगठन प्रदर्शनों को आयोजित करने, उनके बीच तालमेल बनाने या सोशल मीडिया के जरिए उनका प्रचार करने में शामिल हैं.

इंडियन अलायंस पेरिस (IAP) नाम के संगठन फ्रांस और भारत में हो रहे प्रदर्शनों के बीच संपर्क बनाने का काम करता है. यह फ्रांस में सक्रिय संगठन है, जिसने न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित द पीपल्स फोरम के साथ मिलकर भी काम किया है. संगठन ने भारत के प्रदर्शनों का जिक्र किया और उन्हें दूसरे देशों में हो रहे आंदोलनों के साथ जोड़कर देखा. IAP ने फ्रांस और भारत में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े संदेश साझा किए. हालांकि, रिपोर्ट में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया है कि इन संगठनों ने भारत में प्रदर्शन भड़काए या उन्हें विदेश से कंट्रोल किया.

भारत से क्या है कनेक्शन?

रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल (Progressive International) नाम के संगठन का जिक्र है. यह अलग-अलग देशों के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों को जोड़ने की बात करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस संगठन ने 16 अक्टूबर को जारी एक जानकारी में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र एक साथ किया. संगठन ने सवाल उठाया कि इन आंदोलनों को संगठित राजनीतिक ताकत में कैसे बदला जा सकता है. उसने यह भी कहा कि वह ऐसे आंदोलनों को समर्थन देने और उनके बीच संपर्क बनाने की कोशिश कर रहा है.

कोडपिंक और ब्रेकथ्रू न्यूज का भी जिक्र

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में अमेरिकी कारोबारी नेविल रॉय सिंघम से जुड़े संगठनों का भी जिक्र है. फॉक्स न्यूज के मुताबिक, सिंघम से जुड़े मीडिया समूहों ने यूरोप के प्रदर्शनों का प्रचार किया है. इनमें कोडपिंक (CODEPINK) और ब्रेकथ्रू न्यूज (BreakThrough News) शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन संगठनों ने फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों की जानकारी दूसरे देशों तक पहुंचाई. कोडपिंक ने फ्रांस से अमेरिका तक विरोध-प्रदर्शनों के संदेश का जिक्र करते हुए 10 से 12 नवंबर के बीच अमेरिका में अपना अभियान चलाने की बात कही. इस अभियान में संगठन की मांग थी कि सरकार सैन्य खर्च के बजाय एजुकेशन, हेल्थ और घरों पर ज्यादा पैसा खर्च करे.

फ्रांस में आगे क्या करने की तैयारी है?

रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में प्रदर्शनकारी 24 अक्टूबर को फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इसे एक्ट-II नाम दिया गया है. इसके लिए डिजिटल नक्शे पर 212 जगहों पर प्रदर्शन की योजना दिखाई गई थी. इसके बाद 31 अक्टूबर को एक्ट-III और नवंबर में भी प्रदर्शन की योजना बताई गई है.

इसके अलावा, कई देशों के छात्र और युवा संगठन 20 नवंबर को इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक की तैयारी कर रहे हैं. उनकी मांगों में महंगाई, सरकारी खर्च में कटौती, सैन्य खर्च और पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध शामिल है. ध्यान देने वाली बात यह है कि फॉक्स न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में संगठनों के बीच संपर्क और प्रदर्शनों के प्रचार का दावा किया गया है. लेकिन भारत में प्रदर्शन भड़काने या उन्हें विदेश से कंट्रोल करने का पुख्ता सबूत नहीं दिया है.

 

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