UP Elections 2027: ‘अखिलेश 5 चुनाव हार चुके हैं’, ओवैसी का सपा प्रमुख पर तीखा हमला, 2027 से पहले बढ़ी सियासी तकरार

UP Elections 2027

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UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले समाजवादी पार्टी पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हमलावर दिख रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर वह क्या कारण है, जिसकी वजह से अखिलेश यादव ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ अपनी पार्टी का गठबंधन करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने सपा प्रमुख को आत्मचिंतन की सलाह भी दी है। सीएनएन न्यूज-18 को दिए एक इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा,, “पता नहीं समाजवादी पार्टी हमारे साथ गठबंधन करने से क्यों डरती है।” ओवैसी ने समाजवादी पार्टी को बीते कुछ चुनावों में मिली हार पर तंज कसते हुए कहा, “अखिलेश पांच चुनाव हार चुके हैं। उन्हें खुद थोड़ा आत्ममंथन करना चाहिए।”

UP Elections 2027: ‘सपा नहीं चाहती कि मुसलमान नेता बनें’

उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी नहीं चाहती कि मुसलमान नेता बनें। वे बस मतदाता बने रहें और चुप रहें।” उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि वह इस समुदाय से चुनावी समर्थन तो चाहती है, लेकिन उन्हें राजनीतिक नेतृत्व में कोई बड़ी भूमिका नहीं देना चाहती। ओवैसी ने जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया, “अखिलेश आजम खान से जेल में तब मिलने गए जब मैंने यह कहा कि वे कभी उनसे मिलने नहीं गए थे।” (UP Election 2027)

ओवैसी ने इस दौरान समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अखिलेश सरकार के समय मुजफ्फरनगर दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ।” ओवैसी ने इस बात को बार-बार दोहराया कि मुसलमानों को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत है, न कि स्थापित पार्टियों द्वारा उन्हें केवल एक वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किए जाने की।

आखिर AIMIM से गठबंधन करने से क्यों डरती है सपा?

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी द्वारा ओवैसी के प्रस्ताव को नजरअंदाज करने और उनसे दूरी बनाने के पीछे गहरे चुनावी और रणनीतिक वजह हैं।

बीजेपी को ‘ध्रुवीकरण’ का मौका मिलने का डर

सपा को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि यदि वे खुले तौर पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से हाथ मिलाते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनाव को ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ की धुरी पर मोड़ने का सीधा मौका मिल जाएगा। ओवैसी की आक्रामक छवि और उनके बयानों को बीजेपी बहुसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर सकती है, जिससे सपा को होने वाला संभावित फायदा नुकसान में बदल सकता है।

अखिलेश यादव का ‘PDA’ फॉर्मूला बनाम ओवैसी का ‘MD’

लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता पाने के बाद अखिलेश यादव PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले पर चल रहे हैं। सपा अपनी छवि को केवल एक ‘मुस्लिम-यादव (MY)’ पार्टी से ऊपर उठाकर व्यापक गैर-यादव ओबीसी और दलितों तक ले जाना चाहती है। ओवैसी के साथ आने से सपा की छवि दोबारा केवल मुस्लिम-केंद्रित राजनीति तक सीमित होने का खतरा रहेगा, जिससे उनका गैर-मुस्लिम वोट बैंक खिसक सकता है। (UP Election 2027)

मुस्लिम वोटों पर एकाधिकार खोने का डर

उत्तर प्रदेश में लगभग 20% मुस्लिम मतदाता हैं, जो पारंपरिक रूप से भाजपा को हराने के लिए मजबूत विकल्प के रूप में सपा को वोट देते आए हैं। यदि सपा AIMIM को अपने साथ गठबंधन में हिस्सेदार बनाती है, तो वह अनजाने में उत्तर प्रदेश की जमीन पर ओवैसी की पार्टी को मान्यता और मजबूती देगी। इससे भविष्य में मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा का एकाधिकार कमजोर हो सकता है।

कांग्रेस के साथ मौजूदा मजबूत गठबंधन

सपा इस समय कांग्रेस के साथ गठबंधन में है। इंडिया (INDIA) ब्लॉक के तहत कांग्रेस और सपा का यह तालमेल लोकसभा चुनाव में काफी सफल रहा। कांग्रेस भी ओवैसी की राजनीति को ‘विभाजनकारी’ मानती है, इसलिए अखिलेश यादव अपने मौजूदा और भरोसेमंद साथी कांग्रेस को नाराज कर कोई नया और जोखिम भरा प्रयोग नहीं करना चाहते। (UP Election 2027)

2027 की चुनावी राह और चुनौतियां

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असदुद्दीन ओवैसी का यह आक्रामक रुख उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड में सपा-कांग्रेस गठबंधन के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। ओवैसी भले ही पूरे राज्य में न जीत सकें, लेकिन उनके उम्मीदवार कुछ सीटों पर मुस्लिम वोटों का बंटवारा कर सपा के खेल को बिगाड़ सकते हैं, जैसा कि बिहार चुनावों में देखा गया था।

गेंद अब पूरी तरह से विपक्ष के पाले में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश यादव ओवैसी की इस ‘आत्मचिंतन’ वाली सलाह पर कोई गुप्त रणनीति अपनाते हैं या फिर अपने स्टैंड पर कायम रहकर अकेले और कांग्रेस के भरोसे ही 2027 के महासमर में उतरते हैं। (UP Election 2027)

 


 

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