Mirzapur Irrigation Department Scam: उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में एक ऐसा सनसनीखेज घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों और सरकारी ट्रेजरी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिर्जापुर कैनाल डिविजन के लघु डाल पम्प कैनाल खंड में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति के 344 कथित फर्जी कर्मचारियों के खातों में करीब 16 करोड़ रुपये का एरियर भुगतान ट्रांसफर कर दिया गया।
इस महाघोटाले का भंडाफोड़ महालेखाकार (AG) की ऑडिट टीम ने अपनी रूटीन जांच के दौरान किया, जिसके बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। इस बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद विभाग के एकाउंटेंट को निलंबित कर दिया गया है और उच्च स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
Mirzapur Irrigation Department Scam: ट्रेजरी सिस्टम में सेंध, 344 फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 16 करोड़ का खेल
यह पूरा मामला मिर्जापुर कैनाल डिविजन के लघु डाल पम्प कैनाल खंड से जुड़ा हुआ है। विभाग के भीतर बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और एकाउंटेंट की मिलीभगत से इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया। इस महाघोटाले को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया गया। सबसे पहले सरकारी ट्रेजरी प्रणाली में सेंध लगाकर 344 ऐसे लोगों के नाम दर्ज किए गए, जिनकी सिंचाई विभाग में कभी कोई नियुक्ति ही नहीं हुई थी।
नियमों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 के बकाया एरियर का भुगतान साल 2026 में किया जाना था। इसी अवधि का फायदा उठाकर इन 344 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर भारी-भरकम एरियर की फाइलें तैयार की गईं। बिना किसी वेरिफिकेशन या नियुक्ति पत्र के, इन खातों में कुल 16 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि ट्रांसफर कर दी गई और उसे बैंकों से निकाल भी लिया गया। (Mirzapur Irrigation Department Scam)
ऑडिट में हुआ भंडाफोड़ और अफसरों की लीपापोती की कोशिश
यह घोटाला तब तक फाइलों में दबा रहा जब तक महालेखाकार (AG) की ऑडिट टीम ने वित्तीय खातों का औचक निरीक्षण नहीं किया। ऑडिट टीम ने जब 344 कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति पत्र और उनके एरियर भुगतान के मिलान की मांग की, तो विभाग के पास इसका कोई जवाब नहीं था। जांच में साफ हो गया कि कागजों पर जिन कर्मचारियों को करोड़ों रुपये बांटे गए, वे असल में विभाग का हिस्सा कभी थे ही नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही यह मामला उजागर हुआ और विभाग में खलबली मची, वैसे ही घोटाले को दबाने के लिए उच्च अधिकारियों के स्तर पर लीपापोती की कोशिशें शुरू हो गईं। मामले को रफा-दफा करने के उद्देश्य से आनन-फानन में शासकीय मद में घोटाला की गई रकम से भी अधिक धनराशि जमा करा दी गई, ताकि ऑडिट के आक्षेपों से बचा जा सके। हालांकि, ऑडिट टीम ने इन संदिग्ध ट्रांजैक्शन्स को अपनी रिपोर्ट में पकड़ लिया और मामले को दबाने की यह कोशिश नाकाम रही। (Mirzapur Irrigation Department Scam)
अब तक की कार्रवाई और प्रशासनिक हड़कंप
ऑडिट रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि होने के बाद सिंचाई विभाग के शीर्ष अधिकारियों को एक्शन मोड में आना पड़ा है। शुरुआती जांच में दोषी पाए गए संबंधित डिवीजन के एकाउंटेंट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बिना किसी उच्चाधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर या लॉगिन अप्रूवल के ट्रेजरी से इतनी बड़ी रकम का निकलना असंभव है। इसलिए मिर्जापुर कैनाल डिविजन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं।
शासन स्तर पर इस बात की रणनीति बनाई जा रही है कि जिन फर्जी खातों में 16 करोड़ रुपये भेजे गए, वे किनके थे और उन पैसों को कैसे रिकवर किया जाए। इस रैकेट में शामिल बाहरी बिचौलियों और विभागीय नेटवर्क के खिलाफ जल्द ही एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। (Mirzapur Irrigation Department Scam)
सरकारी सिस्टम पर खड़े होते बड़े सवाल
उत्तर प्रदेश में सरकारी भुगतानों को पारदर्शी बनाने के लिए ई-पेंशन, डिजिटल ट्रेजरी और ऑनलाइन पे-रोल सिस्टम जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां लागू की गई हैं। इसके बावजूद इतना बड़ा घोटाला होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
- क्या ट्रेजरी का ऑनलाइन डेटाबेस पूरी तरह सुरक्षित है, या इसमें बैकडोर एंट्री मुमकिन है?
- कर्मचारियों की बिना नियुक्ति के उनके नाम पे-रोल और एरियर लिस्ट में कैसे शामिल हो गए?
- क्या विभाग के भीतर आंतरिक ऑडिट या मंथली वेरिफिकेशन की व्यवस्था पूरी तरह ठप थी?
यह महाघोटाला साफ तौर पर दर्शाता है कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, यदि मैन्युअल स्तर पर बैठे अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त हों, तो सरकारी खजाने में सेंध लगाना मुश्किल नहीं है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर रुक जाती है या इस सिंडिकेट के पीछे छिपे बड़े मगरमच्छों को भी सलाखों के पीछे भेजती है। (Mirzapur Irrigation Department Scam)









