अंतरिक्ष में हथियार तैनात करेगा अमेरिका! स्पेस वॉर को लेकर बढ़ सकती है महाशक्तियों के बीच तनातनी

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अंतरिक्ष पर अपनी बादशाहत को लेकर दुनिया के कई देशों में संघर्ष तेज होने के आसार बन गए हैं. अमेरिका ने ऐलान किया है कि उसने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर दिए हैं. अमेरिकी वायुसेना के सेक्रेटरी ट्रॉय मींक ने बताया कि अमेरिकी सेना की सुरक्षा के लिए इनका इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका के रूप में पहली बार किसी देश ने अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती की बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है. अमेरिकी वायुसेना के सेक्रेटरी ट्रॉय मींक ने कहा, हम जहां भी हों, उभरते खतरों की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा. यही वजह है कि अमेरिका ने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर दिए हैं.”

उभरती चुनौतियों के लिए तैयार होना होगाः मींक

ट्रॉय मींक ने मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में एयर एंड स्पेस फोर्सेस एसोसिएशन की ओर से आयोजित सालान आयोजन’एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस’ में कहा, “आज हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हम जहां भी हों, उभरते खतरों की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा.” उन्होंने आगे कहा, “यही वजह है कि अमेरिका के पास अब अंतरिक्ष में ऐसे हथियार हैं जो दुश्मन की कार्रवाई के खिलाफ संयुक्त सेना की रक्षा करने में सक्षम हैं.”

हालांकि मींक ने किस तरह के हथियारों की तैनाती की गई, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी और जब उनसे इस मामले में विस्तार से बताने के लिए कहा गया, तो उन्होंने और जानकारी देने से मना कर दिया. साथ ही उनके बयान से यह साफ भी नहीं हो सका है कि इन हथियारों को अंतरिक्ष में कब भेजा गया था.

अंतरिक्ष के लिए बढ़ती जा रही हथियारों की होड़

इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस स्पेस फोर्स (US Space Force) की तारीफ की है, जिसे उन्होंने 2019 में वायु सेना के हिस्से के रूप में तैयार किया था. इसे अमेरिका की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया था, खासकर ऐसे समय में जब दुनियाभर में हथियारों की होड़ बढ़ रही है और चीन तथा रूस की ओर से अंतरिक्ष में अमेरिका के दबदबे को लगातार चुनौती दी जा रही है.

सीएनएन के मुताबिक, यूएस स्पेस फोर्स की वेबसाइट पर दावा किया गया है, “चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति के तहत अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताएं विकसित और संचालित करता है. तो वहीं रूस अंतरिक्ष को युद्ध का मैदान समझता है और उसका मानना ​​है कि भविष्य के संघर्षों में अंतरिक्ष पर वर्चस्व एक निर्णायक कारक होगा.”

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बार-बार आगाह किया है कि ये दोनों देश नई आक्रामक अंतरिक्ष क्षमताओं की टेस्टिंग कर रहे हैं. इसके लिए उदाहरण भी दिया गया है, जैसे रूस का सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन ट्रेनिंग मिशन, जिसके बारे में वाशिंगटन का दावा है कि यह भविष्य की लड़ाई के लिए “हमले और बचाव की रणनीति” का प्रदर्शन कर सकता है, तो चीन में परमाणु क्षमता वाली आंशिक-कक्षा हाइपरसोनिक मिसाइल (Nuclear Capable Partial-Orbit Hypersonic Missile) तैयार किया गया है.

रूस-चीन पर अंतरिक्ष पर परमाणु हथियार का आरोप

CNN का कहना है कि उसने करीब 2 साल पहले 2024 में यह रिपोर्ट तैयार की, जिसमें अमेरिकी खुफिया जानकारी से पता चलता है कि रूस ने अंतरिक्ष-आधारित परमाणु हथियार विकसित करने की भी कोशिश की है. यह हथियार एक विशाल ऊर्जा तरंग का उपयोग करेगा, जिसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) कहा जाता है, ताकि बड़ी संख्या में कमर्शियल और सरकारी सैटेलाइट्स को बेकार किया जा सके. दूसरी ओर मॉस्को ने इस तरह का दावे का खंडन किया है.

हालांकि अंतरिक्ष में ऐसे हथियार के व्यापक और विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, उन सैटेलाइट्स को खराब करना जिन पर दुनिया मौसम का पूर्वानुमान लगाने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए काफी हद तक निर्भर रहती है, या यहां तक ​​कि ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम को भी प्रभावित किया जा सकता है, जिनका इस्तेमाल बैंकिंग और कार्गो शिपिंग से लेकर राइड-शेयरिंग और एम्बुलेंस भेजने तक हर चीज के लिए किया जाता है.

मींक ने कहा, “यह बहुत जरूरी है कि हम न सिर्फ हवा में बल्कि अंतरिक्ष में भी अपना दबदबा बनाए रखें. हमें इसके लिए ऐसे कदम उठाने पड़े हैं जिनसे यह पक्का हो सके कि अगर हमें कोई खतरा हो, तो हम उसका आसानी से सामना कर सकें.”

हालांकि 1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ (Outer Space Treaty 1967) कक्षा में परमाणु हथियारों या बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियारों पर रोक लगाती है, लेकिन यह अंतरिक्ष में पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल या अंतरिक्ष में मौजूद संपत्तियों के खिलाफ जमीन से मार करने वाले हथियारों के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं लगाती, जिससे इसकी अलग-अलग तरह से व्याख्या करने की गुंजाइश बनी रहती है.

पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए थे, जिसमें अंतरिक्ष में अमेरिकी श्रेष्ठता को “ए मीजर ऑफ नेशनल विजन और विलपावर” बताया गया था. इसमें अगली पीढ़ी की मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी तैयार करने और खतरों, जिसमें “अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती” भी शामिल है, का मुकाबला करने की क्षमता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था.

 

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